जो परिवार का नहीं हुआ वो प्रदेश का क्या होगा? भाजपा का समाजवादी पार्टी पर तंज



लखनऊ। मुलायम सिंह यादव के कुनबे से एक के बाद एक कई सदस्य भाजपा में शामिल हो रहे है। मुलायम के समधी के बाद बहू अपर्णा यादव और अब साढ़ू प्रमोद गुप्ता भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर लिए है। इसे सपा के पारिवारिक कुनबे में भगवा पार्टी की बड़ी सेंध मानी जा रही है। अपर्णा यादव के भाजपा ज्वाइन करने पर भाजपा ने कहा कि  घर, परिवार और समाज को जोड़ने के लिए सम्मान सबसे बड़ी चीज है। अगर आप किसी को सम्मान देंगे तो वह न केवल आपको सम्मान देगा बल्कि आपका होकर भी रहेगा। लगता है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के संस्कार में यह है ही नहीं। सम्मान देना तो दूर की बात, अपने हित में वह अपने लोगों को अपमानित करने से भी नहीं बाज आते। यही वजह है कि उनके घर के ही लोग एक-एक कर उनका साथ छोड़ते जा रहे हैं। इसी क्रम में उनके भाई की पत्नी अपर्णा यादव ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। भारतीय जनता पार्टी उप्र की ओर से सोशल मीडिया एप कू पर मुलायम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, अपर्णा यादव व प्रमोद गुप्ता की फोटो शेयर करते हुए लिखा गया कि जो परिवार का नहीं हुआ वो प्रदेश का क्या होगा?

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बता दें कि 2017 में लगभग इसी समय की बात है। जिस सपा को मुलायम सिंह ने वर्षों पहले विपरीत परिस्थितियों और तमाम चुनौतियों के बीच अपने संघर्षों के बूते एक मुकाम तक पहुचाया था,  उसका सर्वेसर्वा बनने के लिए अखिलेश ने मुलायम को ही दरकिनार कर दिया। अपने पिता की पगड़ी उछालने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। चुनाव चिह्न साइकिल को लेकर परिवार में उस दौरान जो घमासान मचा था। संघर्ष के उन दिनों अपने भाई मुलायम सिंह यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर जगह उनके साथी थे शिवपाल सिंह यादव। एक तरह से वह उनकी परछाई थे। सपा का संगठन खड़ा करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। इसी वजह से मुलायम की शिवपाल के साथ सहानुभूति भी थी। चाचा की पिता से अति निकटता पसंद नहीं आई तो अखिलेश ने उनको दूध की मक्खी की तरह पार्टी से ही निकाल फेंका। अखिलेश के अपमानजनक व्यवहार से क्षुब्ध होकर शिवपाल को अपना वजूद बचाने और अपने समर्थकों को जोड़े रखने के लिए अलग पार्टी बनानी पड़ी थी। 


इस चुनाव में येन-केन प्रकारेण सत्ता पाने की ख्वाहिश में उन्होंने अपने चाचा शिवपाल से गठबंधन तो किया है, पर सीटों का पेंच अब भी फंसा हुआ है। इसे लेकर शिवपाल नाखुश भी हैं। अगर सीटों के नाते शिवपाल, अखिलेश से अलग होते हैं तब तो यकीनन अखिलेश के बारे में लोग यह भी कहने लगेंगे कि " ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको मैंने ठगा नही"।

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